Tuesday, September 24, 2024




माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल  द्वारा '




 


दैनिक स्वदेश का साप्ताहिक स्तम्भ 












 

ज्ञानतीर्थ सप्रे संग्रहालय परिवार द्वारा दायित्व बढ़ाता चयन 



 


माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल  
 प्रतिवर्ष शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक को सम्मानित करता है।
हिंदी के प्राध्यापक एवं पूर्व प्राचार्य डॉ हरिकृष्ण दत्त की स्मृति में यह सम्मान दिया जा रहा है।सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र, शॉल लेखनी और रु 11000/- सम्मान निधि भेंट की जाती है।
ज्ञानतीर्थ सप्रे संग्रहालय परिवार ने वर्ष 2024 के डॉ हरिकृष्ण दत्त शिक्षा सम्मान के लिए चयननित होना दायित्व बढ़ाता है। 





 


ज्ञानतीर्थ सप्रे संग्रहालय परिवार द्वारा दायित्व बढ़ाता चयन 
माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल  द्वारा 'डॉ हरिकृष्ण दत्त शिक्षा सम्मान' हेतु  इस वर्ष चयनित  

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माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल   प्रतिवर्ष शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक को सम्मानित करता है।
हिंदी के प्राध्यापक एवं पूर्व प्राचार्य डॉ हरिकृष्ण दत्त की स्मृति में यह सम्मान दिया जा रहा है।सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र, शॉल लेखनी और रु 11000/- सम्मान निधि भेंट की जाती है।









 

Sunday, April 28, 2024


दैनिक स्वदेश में प्रति रविवार स्तंभ का लेख 


 


साथ होने की पहली शर्त --डॉ शोभा जैन के संग्रह -तट के पाथर 
https://youtube.com/watch?v=JPn0zW0ji1o&feature=shared



 


 


शब्द संवाद 

https://youtu.be/-DftE13thYA?si=T2rbGPcxLhVSC1Ih 

Wednesday, April 24, 2024

स्वदेश में प्रति रविवार स्तंभ 
इस सप्ताह का लेख 
हम चाहते हैं हमारा वर्चस्व कायम रहे  

21/04/2024

हम जिस समय में हैं हमारा जीवन तनाव, उथल-पुथल और विकारों से भरा हो गया है| जीवन पहले से अधिक जटिल रूप से अन्योन्याश्रित हो गया है। यद्यपि हम बाह्य रूप से विश्व-शांति और अहिंसा की वकालत कर रहे हैं, फिर भी हम युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। यह आधुनिक समय का संकट है कि हम शांति की आकांक्षा तो करते हैं लेकिन मानवजाति के भीषण जनाजे की तैयारी करते हैं। अंततः कोई भी समाधान भ्रम और पूर्वाग्रहों से मुक्त ज्ञान के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।
 आज दो लोगों के बीच मतभेद विचारों की वजह से होते हैं |अपनी बात को सही और दूसरों की बात को गलत मानने के कारण ही समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह साम्राज्यवाद और विचारों में आक्रामकता है जब कोई पक्ष या दूसरा स्वयं को पूर्ण सत्य का एकमात्र स्वामी समझता है, तो यह स्वाभाविक हो जाता है कि दूसरा या तो अपराधी की तरह  असत्य है या  गलत | ऐसी  अलगाववादी प्रवृत्तियों के कारण हर कोई स्वयं को असुरक्षित महसूस करता है। अनेकांत दृष्टि सभी के हितों का चिंतन करता है वह वर्चस्ववाद का विरोधी है |   



 

 किताबें अपरिचय  तोड़ती हैं’
पत्रिका समाचार पत्र में घर के पुस्तकालय पर बात 



 

https://youtu.be/-DftE13thYA?si=gYfmIqfja_fEmAog

Saturday, April 20, 2024

समालोचन--  ''वे रचना या रचनाकार के साथ कोई मुलाहिज़ा  नहीं पालते'
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यह पहला अवसर है जब ९५१ (951 )पृष्ठों के किसी कृतित्व केंद्रित   विशेषांक (शोधपरक) का हिस्सा बनी | 
अंक के कुल जमा ११ अध्याय  में से अध्याय चार -- 'समालोचन' के अंतर्गत   साहित्य, पत्रकारिता जगत के महत्वपूर्ण नामों (लीलाधर मंडलोई जी,प्रियदर्शन जी, विष्णु नागर  जी,प्रकाशकांत जी ,आदि) जिन्हें मैं पढ़ती रहीं हूँ  में अपना नाम देखना आश्चर्य से भर गया|  
विशेषांक में मेरा समालोचकीय लेख १२ पृष्ठों का है जिसका शीर्षक है --- ''वे रचना या रचनाकार के साथ कोई मुलाहिज़ा  नहीं पालते'
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सापेक्ष पत्रिका का अशोक वाजपेयी विशेषांक कल घर पर पहुंचा | सेतु प्रकाशन से प्रकाशित इस विशेषांक का संपादक :महावीर अग्रवाल जी ने किया है यह लेख लिखवाने का श्रेय भी उन्ही को जाता है |  लगभग एक वर्ष पूर्व उन्होंने दिल्ली साहित्य अकादेमी  की पत्रिका -समकालीन भारतीय साहित्य ' में मेरी विस्तृत समीक्षा पढ़ी थी | पत्रिका में दिये नंबर से   मुझे फोन किया |  उस समय इस विशेषांक की तैयारी चल रही थी  | १२ पृ लिखने के लिए मैंने कुछ माह का समय मांगा जो मुझे मिला भी | अब प्रकाशितलेख आपके समक्ष है | 
समग्र अंक पर विस्तार से लिखूंगी 
फ़िलहाल इतना ही कि इसमें आप साहित्य की  लगभग हर विधा से गुजर सकेंगे | अंक में धर्मवीरभारती ,भारत भूषण अग्रवाल , केदारनाथ सिंह    नरेश मेहता ,कुंवर नारायण ,ज्ञानरंजन धूमिल के महत्वपूर्ण पत्र सम्मिलित हैं  तो विष्णु खरे ,कृष्णा सोबती ,विनोद शाही आदि के  साक्षात्कार भी |व्यक्तित्व केंद्रित शीर्षक से बुने  अध्याय में  ध्रुव शुक्ल ,प्रयाग शुक्ल,सुबोध सरकार , अयप्पा पणिक्कर  आदि कई महत्वपूर्ण नाम हैं जिनकी  अनुभवसम्पन्न दृष्टि से अंक बहुत समृद्ध हुआ   |




















 

शुद्ध हिंदी में धाराप्रवाह बोलना, विषय को समझना  और विषय से सम्बद्ध बने रहने का हुनर है युवा होती पीढ़ी में   
इस  समृद्ध अनुभव के लिए बहुत  आभार  डेली कॉलेज, इंदौर 
संदर्भ --पद्मश्री जगन्‍नाथ कृष्‍णा काटे स्मृति अखिल भारतीय हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता
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मित्रों, विगत बुधवार पद्मश्री जे.के.काटे  स्मृति अखिल भारतीय हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता डेली कॉलेज ,इंदौर द्वारा आयोजित की गई | 
(शिक्षाविद -जगन्‍नाथ कृष्‍णा काटे |  शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 1972 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया)
वाद -विवाद के पक्ष -विपक्ष के पहले और  दूसरे चरण में 'अंकीय' निर्णायक की भूमिका मेरे लिए  बड़ी चुनौती भरी रही |
हर पक्ष में  कोई नया तथ्य था|  आत्मविश्वासी कहन  और विषय संरचना में समग्रता   | मेरे साथ अंकीय निर्णायक की भूमिका में वरिष्ठ पत्रकार (पीटीआई से ) हर्षवर्धनप्रकाश   जी रहे | 
विषय रहे --1 --यह सदन मानता है कि कृतिम बुद्धिमत्ता (एआई )वरदान नहीं अभिशाप है 
2 --- नारी सशक्तिकरण के लिए आर्थिक सशक्तिकरण  सबसे ज्यादा जरुरी 
देश  के विविध प्रांतों  से आये  प्रतिष्ठित विद्यालयों के  प्रतिनिधित्वकर्ता की भूमिका  में सभी  उत्कृष्ट प्रतिभागियों की  वाक्पटुता ने बहुत प्रभावित किया | 
मानव-भविष्य को अकल्पनीय तरीकों से आकार देने वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता 
(AI ) से मानवता का अस्तित्व कितने खतरे में  है ,इसकी अच्छी और बुरी संभावनाओं पर युवा मन की यह  बहस बहुत जरुरी लगी | इस विषय के माध्यम से ही सही संभावित जोखिमों और चुनौतियों पर सोचने की नई दृष्टि विस्तार ले सकेगी | 
विशुद्ध अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों का शुद्ध हिंदी में धाराप्रवाह बोलना, विषय को समझना  और विषय से सम्बद्ध होकर सवाल- जवाब रखना आने वाले समय के लिए गहरी आश्वस्ति देता है | 
हमारी कुछ पूर्व निर्धारित धारणाएं बनी हुई हैं  पीढ़ियों के भाषा दायित्व  को लेकर आमतौर पर लगता है वे सजग नहीं है |
 लेकिन इस प्रतियोगिता ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया कि पीढ़ियों को सही निदेशन  की दरकार है | अंग्रेजी माध्यम के बच्चे हिंदी में (शुद्ध हिंदी में )सम -सामयिक विषयों पर बात रखते हैं तो कुछ पुरानी धारणाएं टूटती हैं तो कुछ जुड़ती भी हैं | समय अनुशासन की प्रतिबद्धता  के साथ संपन्न दोनों चरण इंदौर शहर के  प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की पारदर्शिता का भी गहरा  अनुभव दे गये | 






 



Wednesday, March 20, 2024

महिला सशक्तिकरण 


 


साहित्य में आलोचना की स्थिति 

 

साहित्य में कविता की स्थिति 


 

साहित्य में कविता की स्थिति 

 

साहित्य में समकालीनता 

 

मंच पर चढ़ते -उतरते 'अतिथियों' सा नहीं धरातल पर एक साथ समान रूप से बिछे हरसिंगार सा 
आखिर सम्मान के उपलक्ष में रखे आयोजनों से हमें चाहिए क्या होता है ?
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सम्माननीय मित्रों इस महिला दिवस पर एक कोना खंडित होने से बच गया शायद इसलिए कि विवेक की कोई ऐसी जमीन थी जहाँ छोटी -मोटी परस्पर असहमतियों के बावजूद विषय -सत्व को बचाये रखना मूल में था |
साधन के रूप में धन की महत्ता किसी भी युग में कम नहीं रही ,लेकिन ,हमारे समय में उसने 'विचार' का दर्जा हासिल कर लिया है | शायद इसलिए अब आयोजनों में धन वैभव की भव्यता बोलती हैं मंच अक्सर विचार शून्य नजर आता है | बावजूद इसके मंच पर लगभग ‘आधा दर्जन’( इस शब्द का प्रयोग करना विवशता लगी ) अतिथियों का अलग -अलग भूमिकाओं में होना मीडिया कवरेज के लिए जरूर सुलभ साधन हो सकता है लेकिन उसका विषय वस्तु से अंतरंग न हो पाना 'अक्सर' उसकी नियति बन जाती है|
निमंत्रण पत्र (आमंत्रण नहीं )के साथ बिना किसी औपचारिकता के आत्मीय संवाद करना तो हम सभी चाहते हैं क्योकि भीतर से सभी भरे हैं | हर कोई चाहता है कि कोई उसे सुने | इन दिनों जहाँ हम भूल ही चुकें हैं कि ‘’भाषण विहीन’’ आयोजनों का सत्व क्या हो सकता है| कितने परस्पर आत्मीय सम्वादों से हम दूर जा चुके हैं| मंच पर अलग -अलग भूमिकाओं को वहन करने वाले भी नहीं जानते कि उनकी भूमिकाएं विषयों पर कितना खरा उतर सकी | मंच से उतरते ही 'अक्सर' अतिथि, मुख्य अतिथि, अध्यक्ष की ‘’विचार भूमिकाएं’’ भी उतर जाती हैं | ऐसे में इंदौर शहर की प्रतिष्ठित सेवा सुरभि संस्था का अनूठा नवाचार अनुकरणीय हैं जिसे किसी सम्माननीय मिलन उत्सव की तरह सहेजा गया उत्सव में शामिल हर किसी ने लगभग 2-3 मिनट में अपने मन की, अपने समय की अनुभव की बात कही | वाकई कुछ आयोजनों में अनुशासन के कुछ प्रतिबंध अब समय की जरूरत लगते हैं | ऐसे ही कुछ समय के बंध और किसी भी भूमिका के बंधन से मुक्त आयोजन में सहभागी होना नवाचार को विस्तार ही देता है |हमें अब आयोजनों की परिपाटी पर भी विचार करने की जुरूरत है ''सेवा सुरभि'' का यह नवाचार अधिक विस्तार पाये |आयोजनों के लिए कुछ अनुशासन कुछ प्रतिबंध चाहे समय के हो अतिथियों के या फिर आमंत्रित किये जाने वाले पाठक श्रोताओं के कुछ बदलाव तो जरुरी है |
 सूत्रधार की केंद्रीय भूमिका निश्चित ही आयोजन के इस पूरे अनुशासन को साधने का दायित्व निभाती हैं यहाँ भी संजय पटेल भाई साहब के प्रबंधन की जितनी प्रशंसा की जाये कम है | 
इन तस्वीरों में कुछ महत्वपूर्ण सहृदय चेहरे छूटे हुए हैं जो वहां थोड़े समय के लिए ही सही मौजूद रहें आयोजन के आखरी चरण तक न रुक सके |



 



महिला सशक्तिकरण चुनौतियां और संभावनाए 
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस 2024 








 

https://lnkd.in/dV3P32Wj

15 मार्च शुक्रवार रात्रि 9 बजे देवशील मेमोरियल के फ़ेसबुक पेज पर 'एक मुलाक़ात’ कार्यक्रम में मिलते हैं सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.शोभा जैन जी से।
संचालन सुप्रसिद्ध ग़ज़लकारा प्रिय Sonia Aks Sonam का।


 

बी. डी. तोषनीवाल उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय  ,,ग्राम  पालिया