Saturday, October 5, 2024
Thursday, October 3, 2024
ज्ञानतीर्थ सप्रे संग्रहालय के प्रति सादर आभार
दायित्व बढ़ाता सम्मान
02 अक्टूबर 2024
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भारतीय. चिंतन को दिशा देते महत्वपूर्ण व्याख्यान के साथ कल आशीर्वाद मिला महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति आचार्य गिरीश्वर मिश्र सर का, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत सर को एक देश एक चुनाव विषय पर सुनना सुखद रहा।
आप सभी वरिष्ठजनों से सम्मानित होना गहरा दायित्व बोध देता है। ज्ञान तीर्थ के संरक्षक कर्मयोगी समर्पित व्यक्तित्व पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर सर ने चार दशकों में हम सभी के लिए एक विरासत खड़ी की है एआई के प्रभुत्व के दौर में भारतीय वेदों में, शास्त्रों में, मीमांसा में जो लॉजिक विकसित हुआ है,, माधवराव सप्रे संग्रहालय जैसे संस्थानों में संग्रहित हैं,संग्रहालय के प्रति आत्मीय आभार..शोधार्थियों को जब कोई रास्ता न सूझे एक बार यहाँ दर्शन करने अवश्य आएं .
सूत्रधार के रूप में वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल सर ने आयोजन के दिशा निदेशक का गंभीर दायित्व निर्वहन किया।
छोटी सी ही सही वरिष्ठ पत्रकार ,संपादक पंकज शुक्ल जी से भेंट अत्यंत सुखद रही .
कुल तीन चरणों में हुए कार्यक्रम में व्याख्यान,सम्मान के साथ ही विहान नाट्य मंडली के कलाकारों की सांगीतिक प्रस्तुति ‘गांधी गाथा’ की अनुपम प्रस्तुति अद्भुत मंचन सदा स्मरण रहेगा। महात्मा गांधी की पूरी जीवन यात्रा को बुंदेली बोली में बड़े ही रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया। इसका निर्देशन सौरभ अनंत द्वारा किया गया ।
सप्रे संग्रहालय द्वारा दिये जाने वाले प्रतिष्ठित पुरस्कार के अंतर्गत संग्रहालय के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ‘महात्मा गांधी सम्मान’ से भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओमप्रकाश रावत जी को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए विभूषित किया गया। ‘डा. लक्ष्मीनारायण गुप्त महाकोशल पत्रकारिता पुरस्कार’ संस्कारधानी जबलपुर के प्रतिभावान पत्रकार तरुण मिश्र जी को प्रदान किया गया।समारोह में संग्रहालय पर केंद्रित वृत्त चित्र ‘विरासत: सप्रे संग्रहालय’ का लोकार्पण भी किया गया इसे देखना अपने आप में एक अनूठा अनुभव रहा ।हालांकि इस पवित्र विरासत को चंद मिनटों में समेटना दूभर है किन्तु फिर भी वृत्तचित्र का निर्माण माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सिनेमा अध्ययन विभाग द्वारा जिस तरह किया गया है एक शोध संक्षेपिका अवश्य है । विभागाध्यक्ष डा. पवित्र श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में विभाग के विद्यार्थियों ने इस वृत्तचित्र का निर्माण किया है जिसमें ज्ञानतीर्थ सप्रे संग्रहालय के चार दशक की विकास यात्रा को बहुत ही सहज-सरल रूप में प्रदर्शित किया गया है। इसमें संग्रहालय में रखी गई सामग्री, शोधार्थियों के अनुभव तथा अन्य प्रबुद्धों के विचार समाहित हैं।
Tuesday, September 24, 2024
माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल
प्रतिवर्ष शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक को सम्मानित करता है।
हिंदी के प्राध्यापक एवं पूर्व प्राचार्य डॉ हरिकृष्ण दत्त की स्मृति में यह सम्मान दिया जा रहा है।सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र, शॉल लेखनी और रु 11000/- सम्मान निधि भेंट की जाती है।
ज्ञानतीर्थ सप्रे संग्रहालय परिवार ने वर्ष 2024 के डॉ हरिकृष्ण दत्त शिक्षा सम्मान के लिए चयननित होना दायित्व बढ़ाता है।
ज्ञानतीर्थ सप्रे संग्रहालय परिवार द्वारा दायित्व बढ़ाता चयन
माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल द्वारा 'डॉ हरिकृष्ण दत्त शिक्षा सम्मान' हेतु इस वर्ष चयनित
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माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल प्रतिवर्ष शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक को सम्मानित करता है।
हिंदी के प्राध्यापक एवं पूर्व प्राचार्य डॉ हरिकृष्ण दत्त की स्मृति में यह सम्मान दिया जा रहा है।सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र, शॉल लेखनी और रु 11000/- सम्मान निधि भेंट की जाती है।
Sunday, April 28, 2024
Wednesday, April 24, 2024
स्वदेश में प्रति रविवार स्तंभ
इस सप्ताह का लेख
हम चाहते हैं हमारा वर्चस्व कायम रहे
21/04/2024
हम जिस समय में हैं हमारा जीवन तनाव, उथल-पुथल और विकारों से भरा हो गया है| जीवन पहले से अधिक जटिल रूप से अन्योन्याश्रित हो गया है। यद्यपि हम बाह्य रूप से विश्व-शांति और अहिंसा की वकालत कर रहे हैं, फिर भी हम युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। यह आधुनिक समय का संकट है कि हम शांति की आकांक्षा तो करते हैं लेकिन मानवजाति के भीषण जनाजे की तैयारी करते हैं। अंततः कोई भी समाधान भ्रम और पूर्वाग्रहों से मुक्त ज्ञान के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।
आज दो लोगों के बीच मतभेद विचारों की वजह से होते हैं |अपनी बात को सही और दूसरों की बात को गलत मानने के कारण ही समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह साम्राज्यवाद और विचारों में आक्रामकता है जब कोई पक्ष या दूसरा स्वयं को पूर्ण सत्य का एकमात्र स्वामी समझता है, तो यह स्वाभाविक हो जाता है कि दूसरा या तो अपराधी की तरह असत्य है या गलत | ऐसी अलगाववादी प्रवृत्तियों के कारण हर कोई स्वयं को असुरक्षित महसूस करता है। अनेकांत दृष्टि सभी के हितों का चिंतन करता है वह वर्चस्ववाद का विरोधी है |
Saturday, April 20, 2024
समालोचन-- ''वे रचना या रचनाकार के साथ कोई मुलाहिज़ा नहीं पालते'
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यह पहला अवसर है जब ९५१ (951 )पृष्ठों के किसी कृतित्व केंद्रित विशेषांक (शोधपरक) का हिस्सा बनी |
अंक के कुल जमा ११ अध्याय में से अध्याय चार -- 'समालोचन' के अंतर्गत साहित्य, पत्रकारिता जगत के महत्वपूर्ण नामों (लीलाधर मंडलोई जी,प्रियदर्शन जी, विष्णु नागर जी,प्रकाशकांत जी ,आदि) जिन्हें मैं पढ़ती रहीं हूँ में अपना नाम देखना आश्चर्य से भर गया|
विशेषांक में मेरा समालोचकीय लेख १२ पृष्ठों का है जिसका शीर्षक है --- ''वे रचना या रचनाकार के साथ कोई मुलाहिज़ा नहीं पालते'
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सापेक्ष पत्रिका का अशोक वाजपेयी विशेषांक कल घर पर पहुंचा | सेतु प्रकाशन से प्रकाशित इस विशेषांक का संपादक :महावीर अग्रवाल जी ने किया है यह लेख लिखवाने का श्रेय भी उन्ही को जाता है | लगभग एक वर्ष पूर्व उन्होंने दिल्ली साहित्य अकादेमी की पत्रिका -समकालीन भारतीय साहित्य ' में मेरी विस्तृत समीक्षा पढ़ी थी | पत्रिका में दिये नंबर से मुझे फोन किया | उस समय इस विशेषांक की तैयारी चल रही थी | १२ पृ लिखने के लिए मैंने कुछ माह का समय मांगा जो मुझे मिला भी | अब प्रकाशितलेख आपके समक्ष है |
समग्र अंक पर विस्तार से लिखूंगी
फ़िलहाल इतना ही कि इसमें आप साहित्य की लगभग हर विधा से गुजर सकेंगे | अंक में धर्मवीरभारती ,भारत भूषण अग्रवाल , केदारनाथ सिंह नरेश मेहता ,कुंवर नारायण ,ज्ञानरंजन धूमिल के महत्वपूर्ण पत्र सम्मिलित हैं तो विष्णु खरे ,कृष्णा सोबती ,विनोद शाही आदि के साक्षात्कार भी |व्यक्तित्व केंद्रित शीर्षक से बुने अध्याय में ध्रुव शुक्ल ,प्रयाग शुक्ल,सुबोध सरकार , अयप्पा पणिक्कर आदि कई महत्वपूर्ण नाम हैं जिनकी अनुभवसम्पन्न दृष्टि से अंक बहुत समृद्ध हुआ |
शुद्ध हिंदी में धाराप्रवाह बोलना, विषय को समझना और विषय से सम्बद्ध बने रहने का हुनर है युवा होती पीढ़ी में
इस समृद्ध अनुभव के लिए बहुत आभार डेली कॉलेज, इंदौर
संदर्भ --पद्मश्री जगन्नाथ कृष्णा काटे स्मृति अखिल भारतीय हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता
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मित्रों, विगत बुधवार पद्मश्री जे.के.काटे स्मृति अखिल भारतीय हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता डेली कॉलेज ,इंदौर द्वारा आयोजित की गई |
(शिक्षाविद -जगन्नाथ कृष्णा काटे | शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 1972 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया)
वाद -विवाद के पक्ष -विपक्ष के पहले और दूसरे चरण में 'अंकीय' निर्णायक की भूमिका मेरे लिए बड़ी चुनौती भरी रही |
हर पक्ष में कोई नया तथ्य था| आत्मविश्वासी कहन और विषय संरचना में समग्रता | मेरे साथ अंकीय निर्णायक की भूमिका में वरिष्ठ पत्रकार (पीटीआई से ) हर्षवर्धनप्रकाश जी रहे |
विषय रहे --1 --यह सदन मानता है कि कृतिम बुद्धिमत्ता (एआई )वरदान नहीं अभिशाप है
2 --- नारी सशक्तिकरण के लिए आर्थिक सशक्तिकरण सबसे ज्यादा जरुरी
देश के विविध प्रांतों से आये प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्रतिनिधित्वकर्ता की भूमिका में सभी उत्कृष्ट प्रतिभागियों की वाक्पटुता ने बहुत प्रभावित किया |
मानव-भविष्य को अकल्पनीय तरीकों से आकार देने वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता
(AI ) से मानवता का अस्तित्व कितने खतरे में है ,इसकी अच्छी और बुरी संभावनाओं पर युवा मन की यह बहस बहुत जरुरी लगी | इस विषय के माध्यम से ही सही संभावित जोखिमों और चुनौतियों पर सोचने की नई दृष्टि विस्तार ले सकेगी |
विशुद्ध अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों का शुद्ध हिंदी में धाराप्रवाह बोलना, विषय को समझना और विषय से सम्बद्ध होकर सवाल- जवाब रखना आने वाले समय के लिए गहरी आश्वस्ति देता है |
हमारी कुछ पूर्व निर्धारित धारणाएं बनी हुई हैं पीढ़ियों के भाषा दायित्व को लेकर आमतौर पर लगता है वे सजग नहीं है |
लेकिन इस प्रतियोगिता ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया कि पीढ़ियों को सही निदेशन की दरकार है | अंग्रेजी माध्यम के बच्चे हिंदी में (शुद्ध हिंदी में )सम -सामयिक विषयों पर बात रखते हैं तो कुछ पुरानी धारणाएं टूटती हैं तो कुछ जुड़ती भी हैं | समय अनुशासन की प्रतिबद्धता के साथ संपन्न दोनों चरण इंदौर शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की पारदर्शिता का भी गहरा अनुभव दे गये |
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